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68 साल बाद टाटा की हुई एयर इंडिया तो लोगों ने ऐसे दे डाली बधाई

देश की सरकारी एयरलाइन Air India अब टाटा ग्रुप की हो गई है। जी हां, 18000 करोड़ की बोली लगाकर एयर इंडिया को अपना बनाने के बाद रतन टाटा ने Twitter पर लिखा, ‘वेलकम बैक एयर इंडिया।’

उनका यह ट्वीट इंटरनेट पर वायरल हो गया है, जिसे खबर लिखे जाने तक 90 हजार से अधिक लाइक्स और 23 हजार से ज्यादा रीट्वीट मिल चुके हैं। साथ ही, हजारों लोग इस ऐतिहासिक मौके पर रतन टाटा को बधाई दे रहे हैं!

रतन टाटा के इस बयान लिखा गया, ‘टाटा ग्रुप का एयर इंडिया की बोली को जीतना एक शानदार खबर है! हम यह मानते हैं कि एयर इंडिया को फिर से खड़ा करने में काफी मेहनत लगेगी। साथ ही, उन्होंने भविष्य में इसके बाजार के लिए बेहतर साबित होने की उम्मीद जताई।

बयान में आगे लिखा गया, अगर भावनात्मक रूप से कहा जाए तो एक समय JRD TATA के नेतृत्व में एयर इंडिया ने दुनिया की सबसे सम्मानित एयरलाइनों में जगह बनाई थी। अब टाटा के पास उस छवि को फिर से गढ़ने का मौका होगा। यदि आज जेआरडी टाटा हमारे बीच होते तो बहुत खुश होते।’

‘नए सिरे से खड़ा करने में मेहनत लगेगी’

टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने अपने ट्वीट में एअर इंडिया की बिड में टाटा ग्रुप के विनर बनने को बड़ी खबर बताया।

उन्होंने कहा कि एअर इंडिया को नए सिरे से खड़ा करने में बहुत मेहनत लगेगी, लेकिन इससे एविएशन इंडस्ट्री में टाटा ग्रुप को बड़े कारोबारी मौके भी मिलेंगे। रतन टाटा ने कुछ उद्योगों को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की नीति के लिए सरकार की सराहना की।

स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने बधाई दी

एअर इंडिया के लिए दूसरी सबसे ऊंची बोली लगाने वाले कंसॉर्टियम के लीडर और स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह ने डील के लिए टाटा ग्रुप और सरकार, दोनों को बधाई दी है।

उन्होंने कहा कि एअर इंडिया की बिडिंग के लिए शॉर्टलिस्ट होना उनके लिए गौरव वाली बात थी। उन्होंने विश्वास जताया कि टाटा ग्रुप कंपनी का मान-सम्मान वापस लाने में कामयाब रहेगा और भारत को गौरवान्वित करेगा।

किसी भी नॉन एसेट को नहीं बेचा जाएगा

डील में एअर इंडिया की जमीन और इमारतों सहित किसी भी नॉन एसेट को नहीं बेचा जाएगा। कुल कीमत 14,718 करोड़ रुपए के ये एसेट सरकारी कंपनी AIAHL के हवाले कर दिए जाएंगे।

कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी AISATS की आधी हिस्सेदारी भी मिलेगी। दीपम के सेक्रेटरी ने बताया कि स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह के कंसॉर्टियम ने 15,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक डील क्लोज कर ली जाएगी, यानी लेन-देन पूरा हो जाएगा।

कर्मचारियों को एक साल तक रखना होगा

एअर इंडिया के लिए पांच बिडर्स के टेंडर को खारिज कर दिया गया था। वे सरकार की तमाम शर्तों पर खरे नहीं उतर पाए थे। डील के तहत नए बिडर को एक साल तक के लिए एअर इंडिया के कर्मचारियों को भी रखना होगा।

उसके बाद बिडर चाहे तो दूसरे साल से उन्हें VRS दे सकता है। सरकार नए बिडर, यानी टाटा को पूरी एयरलाइंस की जिम्मेदारी 4 महीने में देगी। आज से 15 दिन बाद इसका ट्रांसफर का प्रोसेस शुरू होगा।

12,906 करोड़ रुपए था रिजर्व प्राइस

एअर इंडिया का रिजर्व प्राइस 12,906 करोड़ रुपए था। एअर इंडिया की कीमत उसके एंटरप्राइज वैल्यू पर तय की गई थी। एंटरप्राइज वैल्यू मतलब कंपनी की वैल्यूएशन।

एअर इंडिया शेयर बाजार में लिस्ट नहीं हैं, इसलिए उसकी इक्विटी की कोई वैल्यूएशन नहीं की गई। हो सकता है कि टाटा आगे चलकर इसे शेयर बाजार में लिस्ट करा दें। टाटा ग्रुप की 28 कंपनियां लिस्टेड हैं।

टाटा को कर्ज भी अपने ऊपर लेना होगा

 

बोली जीतने वाले टाटा ग्रुप को 15,300 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेना होगा। एअर इंडिया पर कुल 43 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। इसमें से 20 हजार करोड़ रुपए का कर्ज पिछले दो सालों में बढ़ा है। हालांकि, यह कर्ज सरकार खुद अपने ऊपर लेगी और बोली जीतने वाले, यानी टाटा, के ऊपर 23 हजार करोड़ रुपए का ही कर्ज जाएगा।

बता दें, देश में सिविल एविएशन (नागरिक उड्डयन) की शुरुआत टाटा ग्रुप के संस्थापक जे.आर.डी. टाटा ने ही की थी। उन्होंने ही एयर इंडिया की स्थापना की थी जिसका बाद में नेहरू सरकार ने अधिग्रहण कर लिया था। अब 68 साल बाद फिर एयर इंडिया टाटा ग्रुप के हाथ में है।

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