बूढ़ी मां 20 साल से कंधे पर उठाकर यात्रा करवा रहा बेटा, अनुपम खैर बोले- इसका पता दो मुझे, दिया ये ऑफर…!

ऐक्टर अनुपम खेर इस वक्त बेचैन हैं और आज के जमाने के उस ‘श्रवण कुमार’ की खोज कर रहे हैं जो पिछले 20 साल से बूढ़ी और नेत्रहीन मां को बहंगी में बिठाकर तीर्थ यात्रा करवा रहा है।

अनुपम खेर इस शख्स की मदद करना चाहते हैं और सोशल मीडिया पर उन्होंने उसका पता मांगा है। अनुपम खेर ने कहा कि वो इस शख्स की मां के साथ सारी तीर्थ यात्राओं का खर्चा उठाना चाहते हैं।

20 साल से नेत्रहीन मां को कंधे पर उठा करवा रहा तीर्थ यात्रा

अनुपम खेर ने हाल ही सोशल मीडिया पर एक वायरल तस्वीर देखी, जिसमें एक शख्स नेत्रहीन मां को बहंगी में बिठाए नजर आ रहा था। तस्वीर के साथ उसके बारे में जानकारी भी दी गई थी।

बताया गया कि इस शख्स का नाम कैलाश गिरि ब्रह्माचारी है और वह 20 साल से मां को बहंगी में बिठाकर तीर्थों के दर्शन करवा रहा है। कैलाश गिरि की इस कहानी ने अनुपम खेर को भावुक कर दिया। अनुपम खेर ही नहीं हर वो शख्स भावुक हो गया, जिसे इस मॉडर्न डे के ‘श्रवण कुमार’ के बारे में पता चला।

अनुपम खेर बोले- पता दो, इसकी तीर्थ यात्राओं का सारा खर्च उठाऊंगा

वायरल तस्वीर में कैलाश गिरि कंधे पर बहंगी उठाए है, जिसमें एक टोकरी में बूढ़ी मां बैठी तो दूसरी टोकरी में सामान रखा है। अनुपम खेर ने जब यह तस्वीर देखी तो उनका मन बेचैन हो गया।

उन्होंने ‘मॉडर्न डे श्रवण कुमार’ यानी कैलाश गिरि ब्रह्मचारी की वायरल तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की और लिखा, ‘इस तस्वीर के साथ जो कहानी बताई गई है वो दिल छू गई। प्रार्थना करता हूं कि ये सच हो। अगर किसी को इस शख्स के बारे में कुछ भी पता चले तो मुझे जरूर बताए।

@anupamcares इसकी मां के साथ सारी तीर्थ यात्राओं का खर्च उठाने में खुद को सम्मानित महसूस करेगा। ताउम्र कैलाश जहां भी मां के साथ तीर्थ यात्रा करेगा, उसका सारा खर्च मैं उठाऊंगा।’

ये काम करती है अनुपम खेर की चैरिटी संस्था

 

बता दें कि Anupam Cares एक्टर की एक चैरिटेबल संस्था है, जिसके जरिए वो उन बच्चों की शिक्षा के लिए काम करते हैं जो समाज के वंचित तबकों से आते हैं। इसके अलावा गंभीर बीमारी के शिकार बच्चों और बड़ों के इलाज में भी सहयोग करते हैं।

अनुपम खेर के इस पोस्ट पर फैंस के खूब कॉमेंट आ रहे हैं। फैंस ने अनुपम खेर के इस जेस्चर की तारीफ की और कहा कि बाकी लोग भी उनसे सीखें तो कितना अच्छा रहेगा।