क्रिकेट के लिए ऐसा जूनून की 9 साल 3 महीने का वनवास काट मां से मिला मुंबई इंडियंस का ये क्रिकेटर…!

कहावत है कि मेहनत और लगन के आगे किसी भी मुश्किल चुनौती को बौना किया जा सकता है। इसे चरितार्थ किया है 24 साल के क्रिकेटर कुमार ने, जो सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर के कारण चर्चा में हैं।

कार्तिकेय पहली बार तब सुर्खियों में आए थे जब उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग 2022 में मुंबई इंडियंस ने मोहम्मद अरशद खान की जगह अपनी टीम में शामिल किया था। आईपीएल के 15 वें सीजन के लिए जब ऑक्शन हुआ तो कार्तिकेय को कोई खरीददार नहीं मिला था लेकिन किस्मत ने पलटी मारी और 20 लाख के बेस प्राइज में नीलामी के बाद उन्हें इस लीग में खेलने का मौका मिल गया जो कि उनके लिए एक सपना था।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

कार्तिकेय ने आईपीएल में तो खेल लिया लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी कहानी काफी संघर्षपूर्ण रही है। क्रिकेट के प्रति कार्तिक का जुनून इस कदर उन पर हावी था कि उन्होंने महज 15 साल की उम्र में घर छोड़ दिया और ठान लिया कि जब तक उन्हें आईपीएल में खेलने का मौका नहीं मिलता है वह अपने घर वापस नहीं जाएंगे।

कार्तिकेय ने ठीक ऐसा ही किया। वह पूरे 9 साल 3 महीने के बाद अब अपने माता पिता नहीं मिले। कार्तिकेय ने अपनी भावुक मुलाकात की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की है। उन्होंने फोटो शेयर करते हुए कहा, ‘9 साल 3 महीने बाद अपने परिवार और मां से मिला। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हूं।’

क्रिकेट के लिए छोड़ दिया घर

 

क्रिकेट के लिए कार्तिकेय ने महज 15 साल की उम्र में अपने होमटाउन कानपुर को छोड़ दिया। कानपुर से वह दिल्ली आ गए। दिल्ली में राधेश्याम नाम दोस्त उनका सहारा बना। राधेश्याम यहां लीग क्रिकेट खेलते थे।

इसके बाद दोनों ने साथ में क्रिकेट एकेडमी में जाने का फैसला किया लेकिन पैसों की तंगी के कारण उन्हें कोई भी क्रिकेट एकेडमी नहीं मिला। वहीं कार्तिकेय ने अपने मां बाप से वादा किया था कि वह क्रिकेट के लिए उन पर कभी भी आर्थिक बोझ नहीं डालेंगे।

पैसों की तंगी तो थी ही, इस बीच वह और उनका दोस्त राधेश्याम गौतम गंभीर के बचपन के कोच संजय भारद्वाज के पास गए। राधेश्याम ने भारद्वाज से कहा की कार्तिकेय के पास देने के लिए पैसे नहीं है, इसके बावजूद उन्होंने मदद की। कार्तिकेय का ट्रायल लिया गया और उनका चयन हो हया।

पैसों के लिए की मजदूरी

कार्तिकेय के पास पैसों की इतनी कमी थी कि उन्हें गाजियाबाद में मजदूरी करनी पड़ी। कार्तिकेय क्रिकेट एकेडमी से लगभग 80 किलोमीटर दूर मजदूरी करने जाते थे। इस दौरान वह कई कई किलोमीटर पैदल भी चलते थे ताकि बिस्कुट खाने के लिए वह 10 रुपए बचा सके।

इस बीच फैक्ट्री के पास ही उन्हें रहने की एक जगह मिल गई थी। वह रात में फैक्ट्री में काम करते थे जबकि दिन में क्रिकेट खेलते थे।

DDCA में नहीं हुआ चयन

कार्तिकेय लगातार स्कूली स्तर शानदार प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने डीडीसीए लीग में 45 विकेट लिए। इसके अलावा दिल्ली के ओम नाथ सूद प्रतियोगिता में में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुने गए थे।

हालांकि इस बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद उनका डीडीसीए ने टॉप-200 में चयन नहीं किया। इस कारण वह बहुत हताश हो गए लेकिन संजय भारद्वाज ने फिर उनकी मदद की।

उनकी इस पोस्ट पर बहुत से लोगों ने कमेंट्स भी किए हैं। बहुत से लोगों ने उनके दृढ़ निश्चय की तारीफ की है। प्रफुल एमबीए चायवाले ने भी उनकी तारीफ की है। हालांकि, बहुत से ऐसे यूजर भी हैं, जिन्होंने इतने दिनों तक मां से दूर रहने पर उनकी आलोचना भी की।