हिमाचल प्रदेश: मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने हासिल की बड़ी जीत, तोड़ा 67 सालों का ये रोचक रिकॉर्ड

राजनीति के धुरंधरों से भरे हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय संसदीय क्षेत्र में लोकसभा के चुनावों से जुड़ा इतिहास भी रोचक है। लेकिन मंगलवार को घोषित हुए उपचुनाव नतीजों में  मंडी संसदीय सीट से कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह की जीत के साथ ही ये इतिहास भी टूट गया है।

इस बार मंडी का सांसद विपक्ष में बैठेगा। इससे पहले इस सीट से जीतने वाला सांसद कभी भी विपक्ष में नहीं बैठा है। यानी, यहां से जीतने वाले सांसद केंद्र में सत्ता के साथ ही रहे। लेकिन 67 सालों से चला रहा यह रोचक क्रम इस बार टूट गया है।

मंडी लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर दौड़ाएं तो 1952 से लेकर अब तक जो भी सांसद रहा वह या तो केंद्र में सत्तारूढ़ दल का या फिर केंद्र सरकार का समर्थन करने वाले दल का रहा है।  एक नजर यहां 1952 से लेकर 1972 तक मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की जीत हुई और केंद्र में भी कांग्रेस की ही सरकारें बनीं।

सांसद सत्तारूढ़ दल के साथ रहा। 1977 में पहली बार केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनी तो मंडी से जनता पार्टी के ठाकुर गंगा सिंह सांसद बने। 1980 व 1984 में फिर से कांग्रेस के सांसद जीते और केंद्र में भी कांग्रेस की ही सरकारें बनीं।

1989 में पहली बार भाजपा के उम्मीदवार महेश्वर सिंह जीते और केंद्र में बनी वीपी सिंह की सरकार को भाजपा ने भी समर्थन दिया। इस लिहाज से महेश्वर सिंह ने भी सत्तापक्ष में ही काम किया। 1996 में कांग्रेस के सुखराम जीते।

तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार तो नहीं बनी लेकिन एचडी देवेगौड़ा व इंद्र कुमार गुजराल की सरकारों को कांग्रेस का समर्थन रहा। 1998 व 1999 में महेश्वर सिंह फिर जीते और इस दौरान केंद्र में एनडीए की सरकारें बनीं जिसमें महेश्वर सिंह सत्तारूढ़ दल के सांसद रहे।

2004, 2009 व 2013 (उपचुनाव) में कांग्रेस जीती व केंद्र में कांग्रेस नीत यूपीए सरकार का हिस्सा यहां के सांसद बने। अब 2021 के उपचुनाव में कांग्रेस जीती है। जबकि इस बार केंद्र में सरकार भाजपा की है, जबकि मंडी सीट से कांग्रेस प्रत्याशी ने विजय हासिल की है। ऐसे में इस बार मंडी का सांसद विपक्ष में बैठेगा।

समधी महेश्वर से पहला चुनाव हारी थीं प्रतिभा

प्रतिभा सिंह 1998 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। पहला चुनाव इसी संसदीय क्षेत्र से लड़ा था, जब भाजपा के महेश्वर सिंह ने उन्हें करीब सवा लाख मतों से पराजित किया था। महेश्वर सिंह उनके समधी हैं। 1998 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी। सरकार 13 माह ही चल पाई थी।

1999 में लोकसभा का दोबारा चुनाव हुआ था। प्रतिभा सिंह ने यह चुनाव नहीं लड़ा था। 2004 के आम लोकसभा चुनाव में उन्होंने दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी। समधी महेश्वर सिंह से 1998 की हार का बदला लेकर वह पहली बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुई थीं। 2009 का लोकसभा चुनाव उनके वीरभद्र सिंह ने लड़ा था।

2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया था। 2013 में उपचुनाव हुआ तो प्रतिभा तीसरी बार मैदान में उतरीं। वर्तमान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करीब 1.39 लाख मतों से शिकस्त देकर दूसरी बार संसद सदस्य निर्वाचित हुई थीं।

इसके साल भर बाद 2014 में लोकसभा चुनाव हुआ था। मोदी लहर में भाजपा के रामस्वरूप शर्मा ने उन्हें 39 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। प्रदेश में उस समय कांग्रेस सरकार थी। प्रतिभा सिंह की हार से सब दंग रह गए थे। इस बार करीब सात साल बाद प्रतिभा सिंह दोबारा चुनावी अखाड़े में उतरीं और जीत दर्ज की।