मजदूर की बेटी को इलाज़ के लिए 40 लाख रूपये की जरूरत थी, पंचायत प्रमुख ने इस तरह जमा किये पैसे,,,!

एक कहावत है गांव में पैदा होने वाले बच्चे को एक परिवार नहीं, पूरा गांव बड़ा करता है. शहरों में आज जहां ज़िन्दगियां 2 BHK और 3 BHK में सिमट कर रह गई है. गांव में आज भी पुराने ज़माने के रिवाज़ कायम है.

झगड़े होने के बावजूद पड़ोस की मौसी बाउंड्री से खीर या घी वाली मसालेदार सब्ज़ी की तश्तरी देकर जाएंगी. केरल से ही एक गांव की अनोखी कहानी सामने आई है. इस गांव ने मिलकर एक 7 साल की बच्ची की ज़िन्दगी बचा ली.

घर-घर जाकर ग्राम पंचायत प्रमुख ने पैसा इकट्ठा किया

The New Indian Express के एक लेख के अनुसार, केरल के बाडियाडका ग्राम पंचायत स्थित पिल्लनकट्टा गांव ने पूरे देश के सामने अनोखी मिसाल पेश की है. गांव की 7 साल की सानवी यू के थैलसेमिया से पीड़ित है.

कुम्बाडाजे ग्राम पंचायत प्रमुख हामिद पोसोलिगे और पूर्व प्रेसिडेंट आनंद के मोव्वर घर-घर जाकर सानवी के इलाज के लिए पैसे इकट्ठा किए.

सानवी को डोनर मिल गया है, जल्द होगा ऑपरेशन

सानवी को परफ़ेक्ट डोनर मिल गया है. उसकी बड़ी बहन, तनु्श्री यू के और उसका बोन मैरो मैच हो गया है. 20 जुलाई को बेंगलुरु स्थित मज़ूमदार शॉ मेडिकल सेंटर में सानवी का ऑपरेशन होगा. सानवी का ह्युमन ल्युकोसाइट ऐंटीजेन उसकी बहन से 100% मिलता है.

इस वजह से ऑपरेशन सफल होने के चांस बढ़ गए हैं. सानवी जब सिर्फ़ 4 महीने की थी तभी इस बीमारी की पहचान हो गई थी. सानवी की मां, सविता ने बताया कि पहले उसे हर तीन हफ़्ते में चार बार ब्ल्ड ट्रांसफ़्युज़न की ज़रूरत पड़ती थी.

बाद में चार हफ़्ते में एक बार ब्ल्ड ट्रांसफ़्युज़न होता था. पिता उदय ने बताया कि ब्ल्ड ट्रांसफ़्युज़न में हल्की सी भी देरी हो जाने से सानवी को बुखार आ जाता है, उसे उल्टियां होती है, चेहरा पीला पड़ जाता है.

इलाज के लिए चाहिए 40 लाख रुपये

सानवी बेहद गरीब परिवार से आती है. उसके पिता कॉनक्रीट मज़दूर और मां मनरेगा वर्कर है. आनंद ने बताया कि 20 लाख रुपये इकट्ठा होने पर वे इस परिवार को बेंगलुरू ले जाएंगे.

गांववालों ने पैसे इकट्ठा करने के लिए एक कमिटी बनाई है. हर पार्टी, धार्मिक स्थल, स्कूल आदि के लोग इस कमिटी के सदस्य हैं.गांव के लोग, ग्राम पंचायत के सदस्य अपनी आर्थिक स्थित अनुसार दान कर रहा है.