ममता बनर्जी ने भवानीपुर से दर्ज की बड़ी जीत, ‘खेला होबे’ पर झूमे कार्यकर्ता

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर उपचुनाव में सीएम ममता बनर्जी ने रेकॉर्ड मतों से जीत दर्ज कर ली है। इसी के साथ वह अपनी सीएम पद की कुर्सी बचाने में भी सफल हो गई हैं।

ममता बनर्जी को यहां एकतरफा जीत मिली, उन्होंने बीजेपी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को 58,832 वोटों से पटखनी दी। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव बेहद अहम था क्योंकि सीएम पद पर बने रहने के लिए उन्हें विधानसभा का सदस्य होना जरूरी था।

ममता की प्रतिद्वं’द्वी प्रियंका टिबरेवाल ने कहा कि वह शालीनता के साथ हार को स्वीकार करती हैं। उन्होंने ममता बनर्जी को जीत की बधाई भी दी। साथ ही प्रियंका ने यह भी कहा कि सबसे देखा कि ममता ने कैसे जीत हासिल की।

ममता बनर्जी की जीत के बाद उनके आवास के बाहर जश्न मनाया जा रहा है। कार्यकर्ता एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे हैं और जश्न मना रहे हैं। ममता ने अपने घर के बाहर से ही कार्यकर्ताओं को संबो’धित किया।

‘पहली बार हम भवानीपुर के किसी भी वार्ड में नहीं हारे’

ममता बनर्जी ने भवानीपुर के लोगों को धन्यवाद कहा। शानदार जीत के बाद ममता बनर्जी ने कहा, ‘जब से बंगाल विधानसभा चुनाव शुरू हुआ तब से मेरी पार्टी के खिला’फ साजि’श होती रही। भवानीपुर छोटी सी जगह है फिर भी यहां 3500 सुरक्षा’कर्मी भेजे गए। मेरे पैर को चो’ट पहुंचाई गई ताकि चुनाव न ल’ड़ सकूं। चुनाव आयोग की आभारी हूं। पहली बार ऐसा हुआ है कि भवानीपुर के किसी भी वार्ड में हम हारे नहीं।’

कार्यकर्ताओं से विजय जुलूस न निकालने की अपील

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, कोई भी जीत का जश्न नहीं मनाएंगे। कार्यकर्ता बाढ़ पी’ड़ितों की मदद करें।’ उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हम’ला बोला है।

ममता ने कहा, ‘नंदीग्राम न जीत पाने की बहुत सारी वजहें हैं। जनता ने बहुत सारी सा’जिशों को नाकाम किया है।’ सीएम ममता ने कहा कि भवानीपुर में 46 फीसदी लोग गैर बंगाली हैं लेकिन सभी ने मिलकर वोट किया।

ममता के लिए बेहद अहम था चुनाव

भवानीपुर का रण चुनाव ममता बनर्जी के लिए बेहद अहम था क्योंकि अपने पद पर बने के लिए ममता बनर्जी को विधानमंडल का सदस्य होना जरूरी है। इसके लिए उनके पास 3 नवंबर तक का समय था।

नंदीग्राम से हार गई थीं ममता

भवानीपुर को ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता है। वह यहां से दो बार पहले भी विधायक रह चुकी हैं हालांकि इस साल विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम को चुना था। यहां उन्हें उनके पूर्व सहयोगी और बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से 1,956 वोटों से मात मिली थी।

वहीं भवानीपुर से टीएमसी के वयोवृद्ध नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय विधायक चुने गए। नतीजों के बाद सोबनदेव ने ममता बनर्जी के लिए अपनी सीट खाली छोड़ दी थी।