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नहीं है एक पैर फिर भी लाठी के सहारे रोज चलाते हैं 40km साइकिल, मेनस्ट्रीम मीडिया में वायरल हो रहा विडियो

हौसला हो तो फिर बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना करना आसान हो जाता है। अलीगढ़ के रहने वाले दिव्‍यांग नरेश ऐसे ही एक शख्‍स हैं जिन्‍होंने हौसले के बूते अपनी शरीरिक कम’जोरी को हरा दिया है।

नरेश रोज एक पैर से 40 किलोमीटर का सफर तय कर एक हार्डवेयर फैक्‍ट्री में काम करने जाते और वहां से लौटते हैं। उनका एक पैर 2010 में रेल दुर्घ’टना का शि’कार हो गया था।

अलीगढ़ के अतरौली क्षेत्र के लोधा नगला के रहने वाले नरेश का जीवन संघर्ष और के लिए मिसाल बन रहा है। 2010 में हुई दुर्घट’ना के बाद से वह एक पैर से पूरी तरह दिव्यां’ग है।

इसके बावजूद उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी। वह रोज 40 किलोमीटर एक पैर से साइकिल चलाकर अपनी काम की जगह पर जाते और फिर वापस लौटते हैं। घर से फैक्‍ट्री तक एक तरफ की दूरी 20 किलोमीटर है।

साइकिल पर उनकी रफ्तार और संतुलन साधने का हुनर लोगों को हैरान कर देता है। नरेश को रोज एक निर्धारित समय पर रामघाट रोड पर साइकिल चलाते देखा जा सकता है। वह अलीगढ़ की एक हार्डवेयर फैक्‍ट्री में काम करते हैं। अपनी फैक्‍ट्री में नरेश मजदूर हैं।

काम के अलावा नरेश को कहीं और भी जाना होता है तो वह साइकिल का ही इस्‍तेमाल करते हैं। साइकिल के पैडल मारने के लिए नरेश डंडे का सहारा लेते हैं। उन्हें रोड पर साइकिल चलाते देख लोग आश्‍चर्य से भर जाते हैं।

नरेश बताते हैं कि ट्रेन हादसे में पैर गंवाने के बाद रेलवे से जो आर्थिक मदद मिली थी वह इलाज में खर्च हो गई। उनके सामने मजदूरी के अलावा कोई और विकल्‍प नहीं था। नरेश को लगता है कि उन्‍हें किसी तरह कोई सरकारी नौकरी मिल जाए तो जीवन की राह थोड़ी आसान हो जाएगी।

सरकारी नौकरी मिल जाए

परिजन बताते हैं कि ट्रेन हादसे में रेलवे से जो आर्थिक मदद मिली थी वह इलाज में खर्च हो गई। नरेश मेहनत-मजदूरी करके ही अपनी जीविका चला रहे हैं। उनकी हसरत है कि कोई सरकारी नौकरी मिल जाए तो उनका भला हो जाएगा।

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