10वीं में कूड़ा उठाने वाली मशीन बनाई, राष्ट्रपति ने भी पीठ थपथपाई थी, लेकिन आज पैसे-पैसे को मोहताज है परिवार…!

काबिलियत उम्र नहीं देखती, कम उम्र में व्यक्ति बड़े-बड़े कारनामे कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ बड़ा कर दिखाया है, यूपी के मथुरा के रहने वाले 10वीं के छात्र सिकांतो मंडल ने।

उसने स्कूल में सफाई के दौरान कूड़ा उठाते-उठाते एक मैन्युअल मशीन बना डाला, जिसके लिए राष्ट्रपति ने भी उनके इस प्रोजेक्ट की काफी तारीफ किए।

सिकांतो का परिवार

सिकांतो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के कोदला के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले 15 साल से वह मथुरा के नगला शिवजी में रहते हैं। सिकांतो के पिता प्रशांतो मंडल रिक्शा चलाते है।

उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। उनका छोटा बेटा सिकांतो 10वीं तक जयगुरुदेव बाल्य बालक विद्यादान उच्चतर माध्यमिक स्कूल से पढ़ाई किए।

 6 महीने में बनाया मैन्युअल मशीन

सिकांतो के साइंस टीचर मनोज कुमार ने बताया कि सिकांतो मंडल एक होनहार छात्र है। उनके स्कूल के नियम के अनुसार स्कूल में लड़कियां झाड़ू लगाती हैं और लड़के कूड़ा उठाते हैं। 6 महीने में सिकांतो ने ऐसी गाड़ी बनाई, जिसमें मस्ती करते हुए कूड़ा उठाया जा सकता है।

सिकांतो के इस प्रोजेक्ट को मिली सराहना

सिकांतो बताते हैं कि उनके इस प्रोजेक्ट को देखते हुए जापान की एक कंपनी ने उन्हें 7 दिन के लिए जापान बुलाया है। इसके अलावा सिकांतो को राष्ट्रपति भवन में भी 3 दिन रहने का मौका मिला है।

इस प्रोजेक्ट को देखते हुए हर किसी ने सिकांतो मंडल की तारीफ की है। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करना आसान नहीं है जिसे सिकांतो ने किया।

आज ‘बदहाली की ज़िंदगी’ जी रहा है सिकांतो का परिवार

सिकांतो भावुक होकर कहते हैं, ”सर, आपको लग रहा होगा कि मेरी लाइफ सेट होगी. लेकिन यह सच नहीं है. वर्तमान में मैं और मेरा परिवार पैसे-पैसे को मोहताज है. मैं ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष में हूं.

पढ़ाई पूरी कर सकूं. इसके लिए मैंने एक नौकरी ज्वॉइन कर ली है. पिता पहले ही तरह मजदूरी कर घर चला रहे हैं. किराए के छोटे से घर में रह रही मां को उम्मीद है कि उनका बेटा एक दिन वैज्ञानिक बनेगा.

मेरी कोशिश जारी है. मुझे पता है कि बिना पैसों के आसान नहीं है. लेकिन फिर भी मैं कोशिश करना चाहता हूं. बस आप सब प्यार बनाए रखिए.”