थाइराइड से बचाने वाले प्राकृतिक आयुवेर्दिक नुस्खे

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थाइराइड एक बढ़ती हुई समस्या है। अक्सर बहुत से लोग इस बीमारी से परेशान हैं। यह इंसान के शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है इस समस्या से इंसान की जान तक जा सकती है क्योंकि यह असर धीरे-धीरे करता है। यदि आपको थाइराइड की समस्या हो गई है या आप अपने को थाइराइड की बीमारी से पहले से ही बचाना चाहते हो तो अपने खाने पीने की आदतों में कुछ चीजों का इस्तेमाल करना शुरू कर दें। थाइराइड की समस्या को दूर करने के लिए आपको अधिक मात्रा में प्रोटीनयुक्त, फाइबरयुक्त और विटामिन्स का सेवन करना चाहिए।

थाइराइड से बचाने वाले प्राकृतिक आयुवेर्दिक आहार

साबुत अनाज का सेवन
थाइराइड के मरीजों को चाहिए कि वे साबुत अनाज जैसे पास्ता, जौ, पुराना और भूरा चावलए जई आदि का सेवन जरूर करें। क्योंकि इन चीजों में अधिक मात्रा में मिनरल और विटामिन के साथ-साथ फाइबर की भी अधिक मात्रा होती है। जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।

आयोडीन का सेवन

जिन लोगों को थाइराइड की समस्या है वे अपने खाने में आयोडीय चुक्त चीजों का इस्तेमाल करें। आयोडीन थाइराइड की परेशानी और उसके दुष्प्रभावों को खत्म कर देता है। ध्यान रहे अधिक आयेडीन युक्त नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे थाइराइड बढ़ता है।

सब्जियां और फलों का सेवन

रोगों से लड़ने में मदद करते हैं फल और सब्जियां। फाइबर की मात्रा भी सब्जियों में अधिक होती है। जो थाइराइड की समस्या और उससे होने वाले हानिकारक प्रभावों को खत्म कर देती है। हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन थाइरायड के मरीजों को अधिक से अधिक करना चाहिए। इसके अलावा टमाटर, हरी मिर्च और लाल मिर्च आदि को खाना भी फायदेमंद रहता है। क्योंकि इनमें प्रचुर मात्रा में एंटीआॅक्सीडेंट रहता है। सब्जियों के अलावा आप फलों का सेवन भी अधिक से अधिक करें। फलों में भी पोषक तत्व होते हैं जो थाइराइड की समस्या को ठीक करते हैं।

दही और दूध का प्रयोग
दही और दूध में अधिक मात्रा में कैल्श्यिम, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। जो शरीर के अंदर पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं। इन चीजों का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है और थाइराइड की बीमारी धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।

थाइराइड की बीमारी कोई लाईलाज बीमारी नहीं है। आप पूरी तरह से इस रोग से मुक्त हो सकते हैं।
इन बताए गए आहारों को यदि थाइराइ से परेशान मरीज सेवन करते हैं तो उन्हें इस रोग से जल्दी से छुटकारा मिल सकता है। इन सब चीजों के अलावा एक मुख्य बात यह है कि आप सुबह और शाम योग व टहलें जरूर। आपको जल्दी फायदा मिलेगा।

परहेज :-
मिर्च-मसाला,तेल,अधिक नमक, चीनी, खटाई, चावल, मैदा, चाय, काफी, नशीली वस्तुओं, तली-भुनी चीजों, रबड़ी,मलाई, मांस, अंडा जैसे खाद्यों से परहेज रखें | अगर आप सफ़ेद नमक (समुन्द्री नमक) खाते है तो उसे तुरन्त बंद कर दे और सैंधा नमक ही खाने में प्रयोग करे, सिर्फ़ सैंधा नमक ही खाए सब जगह

1 – गले की गर्म-ठंडी सेंक
साधन :– गर्म पानी की रबड़ की थैली, गर्म पानी, एक छोटा तौलिया, एक भगौने में ठण्डा पानी |
विधि :— सर्वप्रथम रबड़ की थैली में गर्म पानी भर लें | ठण्डे पानी के भगौने में छोटा तौलिया डाल लें | गर्म सेंक बोतल से एवं ठण्डी सेंक तौलिया को ठण्डे पानी में भिगोकर , निचोड़कर निम्न क्रम से गले के ऊपर गर्म-ठण्डी सेंक करें –
३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– १ मिनट ठण्डी
३ मिनट गर्म ——————– ३ मिनट ठण्डी
इस प्रकार कुल 18 मिनट तक यह उपचार करें | इसे दिन में दो बार – प्रातः – सांय कर सकते हैं |

2- गले की पट्टी लपेट :-
साधन :- १- सूती मार्किन का कपडा, लगभग ४ इंच चौड़ा एवं इतना लम्बा कि गर्दन पर तीन लपेटे लग जाएँ |
२- इतनी ही लम्बी एवं ५-६ इंच चौड़ी गर्म कपडे की पट्टी |

विधि :- सर्वप्रथम सूती कपडे को ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें, तत्पश्चात गले में लपेट दें इसके ऊपर से गर्म कपडे की पट्टी को इस तरह से लपेटें कि नीचे वाली सूती पट्टी पूरी तरह से ढक जाये | इस प्रयोग को रात्रि सोने से पहले ४५ मिनट के लिए करें |

3 -गले पर मिटटी कि पट्टी:-
साधन :- १- जमीन से लगभग तीन फिट नीचे की साफ मिटटी |
२- एक गर्म कपडे का टुकड़ा |
विधि :- लगभग चार इंच लम्बी व् तीन इंच चौड़ी एवं एक इंच मोटी मिटटी की पट्टी को बनाकर गले पर रखें तथा गर्म कपडे से मिटटी की पट्टी को पूरी तरह से ढक दें | इस प्रयोग को दोपहर को ४५ मिनट के लिए करें |
विशेष :- मिटटी को ६-७ घंटे पहले पानी में भिगो दें, तत्पश्चात उसकी लुगदी जैसी बनाकर पट्टी बनायें |

4 – मेहन स्नान
विधि :-
एक बड़े टब में खूब ठण्डा पानी भर कर उसमें एक बैठने की चौकी रख लें | ध्यान रहे कि टब में पानी इतना न भरें कि चौकी डूब जाये | अब उस टब के अन्दर चौकी पर बैठ जाएँ | पैर टब के बाहर एवं सूखे रहें | एक सूती कपडे की डेढ़ – दो फिट लम्बी पट्टी लेकर अपनी जननेंद्रिय के अग्रभाग पर लपेट दें एवं बाकी बची पट्टी को टब में इस प्रकार डालें कि उसका कुछ हिस्सा पानी में डूबा रहे | अब इस पट्टी/ जननेंद्रिय पर टब से पानी ले-लेकर लगातार भिगोते रहें | इस प्रयोग को ५-१० मिनट करें, तत्पश्चात शरीर में गर्मी लाने के लिए १०-१५ मिनट तेजी से टहलें |

योग चिकित्सा ***

उज्जायी प्राणायाम :-
पद्मासन या सुखासन में बैठकर आँखें बंद कर लें | अपनी जिह्वा को तालू से सटा दें अब कंठ से श्वास को इस प्रकार खींचे कि गले से ध्वनि व् कम्पन उत्पन्न होने लगे | इस प्राणायाम को दस से बढाकर बीस बार तक प्रतिदिन करें |

प्राणायाम प्रातः नित्यकर्म से निवृत्त होकर खाली पेट करें |

थायरायड की एक्युप्रेशर चिकित्सा ::

एक्युप्रेशर चिकित्सा के अनुसार थायरायड व् पैराथायरायड के प्रतिबिम्ब केंद्र दोनों हांथो एवं पैरों के अंगूठे के बिलकुल नीचे व् अंगूठे की जड़ के नीचे ऊँचे उठे हुए भाग में स्थित हैं

थायरायड के अल्पस्राव की अवस्था में इन केन्द्रों पर घडी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें प्रेशर दें तथा अतिस्राव की स्थिति में प्रेशर दायें से बाएं [ घडी की सुई की उलटी दिशा में ] देना चाहिए | इसके साथ ही पियुष ग्रंथि के भी प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर भी प्रेशर देना चाहिए |

विशेष :-
प्रत्येक केंद्र पर एक से तीन मिनट तक प्रतिदिन दो बार प्रेशर दें |
पियुष ग्रंथि के केंद्र पर पम्पिंग मैथेड [ पम्प की तरह दो-तीन सेकेण्ड के लिए दबाएँ फिर एक दो सेकेण्ड के लिए ढीला छोड़ दें ] से प्रेशर देना चाहिए |

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