UP में मां का मंगलसूत्र बेचकर चालान भरने पहुंचा बेटा, सच्चाई सुन ARTO ने खुद भरा जुर्माना….!

अमूमन ट्रैफिक चालान होने पर लोग जुर्माना भरने से बचने को तरह- तरह के बहाने करते सुने देखे जाते हैं. इस बीच, कोई शख्स चालान की रकम अदा करने के लिए मां का मंगलसूत्र बेचकर परिवहन विभाग में चालान भरने को रकम लेकर पहुंच जाए, ऐसा शायद ही कभी किसी ने कहीं सुना होगा.

ऐसा भी एक वाकया हाल ही में उत्तर प्रदेश के महराजगंज के उप-संभागीय परिवहन अधिकारी के कार्यालय में सामने आया है. जिसकी चर्चा देश भर में हो रही है. यह घटना बुधवार के दिन जिला सहायक परिवहन अधिकारी कार्यालय में देखने को मिली.

टना जिस जिसने भी अपनी आंखों के सामने घटित देखी वही आंखों को नम होने से नहीं रोक पाया. दरअसल बात जुर्माना भरने से हटकर इंसानियत के तकाजे की तरफ जो मुड़ चुकी थी. दरअसल जिसके चलते यह सब देखने को मिला उस युवक का नाम विजय है.

विजय के पिता राजकुमार ऑटो चलाते हैं. उनकी एक आंख में भी तकलीफ रहती है. विजय के परिवार में छह बहनें हैं. कुछ दिन पहले पिता के ऑटो का चालान 24 हजार 500 जैसी भारी भरकम रकम का काट दिया गया था.

मां का मंगलसूत्र बेचकर चालान भरने पहुंचा बेटा

आर्थिक रूप से कमजोर बेटा और पिता के पास चालान की रकम भरने का कोई इंतजाम नहीं था. लिहाज पिता को परेशान देखकर बेटे ने मां का मंगलसूत्र बेचकर जुर्माने की राशि अदा करने का इरादा किया.

बदकिस्मती ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा. जुर्माना राशि भरनी थी साढ़े चौबीस हजार रुपए और मां का मंगलसूत्र बिक कर कुछ 13 हजार रुपए ही मिले. बहरहाल नियत साफ थी सो विजय वे 13 हजार रुपए लेकर ही एआरटीओ दफ्तर चला गया.

एआरटीओ आर सी भारती ने जब कहानी सुनी तो उन्होंने इंसानियत की मिसाल कायम करते हुए पासा ही पलट दिया. उन्होंने वो सब कर डाला जिसने घटनास्थल पर मौजूद हर शख्स की आंख नम कर दी.

गरीब रिक्शा चालक के बेटे की ईमानदारी की चर्चा

एआरटीओ आरसी भारती ने असलियत जानते ही विजय से कहा कि वो जुर्माने की रकम में से एक भी रुपया, मां के मंगलसूत्र को बेचकर हासिल हुई रकम में से जमा न करे. साथ ही जुर्माने की पूरी रकम एआरटीओ ने अपनी सैलरी से भर दी.

फिलहाल न केवल उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग में अपितु देश के कोने-कोने में इस खबर की चर्चा हो रही है. एआरटीओ की सुहृदयता की और एक गरीब रिक्शा चालक की ईमानदारी और निष्ठा की हर तरफ चर्चा हो रही है.

चर्चा एक ऑटो रिक्शा चालक और उसके पुत्र की निष्ठा की हो रही है, जिसने अपनी मां की सुहाग की निशानी ‘मंगलसूत्र’ को बेचकर जुर्माने की राशि सरकारी खजाने में अदा करने जैसा कदम उठा लिया. मारा-मारी के उस दौर में जब लोग दौलत के लिए ‘ईमान’ खोने और बेचने पर आमादा हैं.