मोदी-योगी से लेकर आडवाणी-सोनिया गांधी तक जब ये दिग्गज नेता जनता के बीच फफक-फफककर रो पड़े थे

राजनीति की उठा-पटक कई बार नेताओं की भावनाओं को भी कुरेद देती है। यही कारण है कि कुछ मौके पर कई नेता अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाए और रो पड़े थे। चलिए जानें कि किन मौकों पर कौन से नेता अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए थे।

बीजेपी नेता उमा भारती ने एक बार उनकी खुले मंच से जब तारीफ की थी तो आडवाणी भावुक हो गए थे और उनके आंसू निकल पड़े थे। एक बार और ऐसा मौका और देखा गया था जब सुषमा स्वराज लोकपाल के मुद्दे पर लोकसभा में भाषण दे रही थीं तब भी आडवाणी अपने आप को रोक नहीं पाए और उनकी आँखें नम हो गई थीं।

21 मई 2014 समय जब वह संसद भवन में प्रवेश का मोदी के लिए पहला दिन था। उन्होंने सीढ़ियों पर ही बैठकर संसद को जो प्रणाम किया कि माहौल वहीं से भावुक हो गया। आगे, भीतर जब उनको संसदीय दल का नेता चुना गया तो वे आडवाणी जी की एक बात पर सुबक पड़े।

आडवाणी ने कहा था कि नरेंद्र भाई मोदी ने पार्टी पर बड़ी कृपा की है। इसी शब्द का जवाब देते हुए उनका गला रुंध गया। थोड़ा सुबके। फिर पानी पीकर बोले, भाजपा मेरी मां है। कोई बच्चा अपनी मा पर एहसान थोड़े ही करता है।

एक साल बाद फेसबुक वाले ज़ुकरबर्ग के साथ बात करते हुए वे एक बार फिर सुबक उठे थे। यह तब हुआ जब वे यह बता रहे थे कि उनकी मां दूसरे घरों में बरतन मांजने का काम करती थी। (लेकिन अगले ही दिन वाशिंग्टन पोस्ट ने मोदी के जीवनीकार नीलांजन मुखोपाध्याय के हवाले से लिख दिया कि बर्तन मांजने वाली बात का कोई प्रमाण नहीं है।)

साल 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस की हार हुई थी और इंदिरा गांधी सत्ता से बेदखल हो गई थीं। इन चुनावों के नतीजों से सोनिया गांधी काफी टूट गई थीं और पब्लिकली उनकी आंखें भर आई थीं।

2011 में जयललिता जब तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी थीं तब उन्हें लगा था कि शशिकला उनके खिलाफ सज़िश रच रही हैं, इसलिए उन्होंने 19 दिसंबर 2011 को शशिकला और उनके परिवार के। तब शशिकला जनता के सामने अपना दर्द सुनाते हुए रो पड़ी थीं।

जयपुर में आयोजित एक चिंतन गोष्ठी में राहुल गांधी अपनी दादी और पिता की हत्या के बाद मां के हालात का जिक्र करते हुए रुंवासे हो एक थे।

साल 2006 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में 11 दिन जेल में योगी को डाला गया था। बाहर आने के बाद योगी ने संसद में पुलिस की ब’र्बाता और आम लोगों के अधिकार पर अपनी बात रखते हुए वह रो पड़े थे।

साल 2008 में सोमनाथ चटर्जी लोकसभा स्पीकर थे तब उनकी पार्टी ने उन्हें ये लोस अध्यक्ष का पद छोड़ने को कहा था, लेकिन जब वह नहीं मानें तो उनकी पार्टी ने उन्हें दल से बेदखल कर दिया। इसे बाद सोमनाथ संसद में अपना दर्द बयां कर रो पड़े थे।

पंडित जवाहर लाल नेहरू तब रो पड़े थे जब भारत चीन युद्ध के बाद लता मंगेशकर ने ज़रा आँख में भर लो पानी गीत गाया था।